Wednesday, January 21, 2009

रहस्यमय वेताल प्रदेश की जातियाँ और कबीले

डेंकाली के हजार मील तक फ़ैले विशाल जंगल में अनेक इन्सानी जातियाँ निवास करती हैं. प्रथम वेताल की प्राण-रक्षा करनेवाले और फ़िर उसकी मदद से वसाका हमलावरों को खदेड़ने में सफ़ल होने वाले बांडार बौनों के अलावा और कोई इस बात से परिचित नहीं है कि वेताल भी असल में एक आम इन्सान है और वह एक पारिवारिक परम्परा के तहत दुनिया भर में बुराई के खिलाफ़ संघर्ष करता है. बाकी जातियों का केवल यही विश्वास है कि वेताल अमर है.

जंगल में प्रथम वेताल के आगमन से पूर्व यहाँ के सभी कबीले आपस में निरन्तर संघर्ष करते रहते थे. वेताल के कई पूर्वजों के लगातार प्रयासों का नतीजा है कि अब यहां शांति स्थापित है. हालांकि जंगल के अधिकांश कबीले वेताल के साथ मित्रवत आचरण करते हैं लेकिन कुछ कबीले अभी भी अपने सदियों पुराने स्वरूप को बनाये हुए हैं और जंगल के नियमों पर चलने में ही विश्वास करते हैं.

वेताल प्रदेश में निवास करने वाली कुछ प्रमुख जातियाँ हैं:

१. बांडार बौने - बौने बांडार घने जंगल के बीचों-बीच बीहड़बन (Deep Woods) में निवास करते हैं और वेताल के सबसे घनिष्ठ सहयोगी हैं. वेताल के रहस्य को जानने वाले ये अकेले हैं और बीहड़बन की रक्षा करना इनकी जिम्मेदारी है. ये लोग अपने जहर बुझे तीरों के कारण अन्य सभी जातियों के लिये भी भय का कारण हैं. इनके होते कोई बाहरी व्यक्ति बीहड़बन तक पहुचने की सोच भी नहीं सकता. इनका मुखिया गुर्रन है जो वर्तमान वेताल का बचपन का मित्र है.
२. वाम्बेसी - जंगल की दो सबसे बड़ी जातियों में से एक. ये लोग मुख्यतः खेती-किसानी पर निर्भर करते हैं और वेताल को अपना मित्र मानते हैं. वाम्बेसी जंगल की सबसे धनी जाति है.
३. लोंगो - जंगल की दूसरी बड़ी जाति. वाम्बेसियों से इनकी नहीं बनती पर 'वेताल शांति संधि' के अनुसार ही चलते हैं. इनके जीवन-यापन का मुख्य स्त्रोत पशु-पालन है. पूरे जंगल में लोगों जाति सर्वाधिक भाग्यशाली मानी जाती है.
४. मोरी - मोरी मछुआरों की बस्ती समुद्र तट पर बसी हुई है. ये समुद्र से मछलीयाँ पकड़ते हैं. वेताल के मित्र द्वीप पर पलने वाले शेरों और बाघों के लिये मछलियां पहुंचाने की जिम्मेदारी इनकी ही है.
५. ऊँगान - फ़ुसफ़ुसाते कुंज (Whispering Grove) के पास के जंगल में निवास करने वाले ये लोग उंचे दर्जे के कलाकार हैं. ऊँगान लोग लकड़ी से कमाल की कलाकृतियाँ गढ़ने में माहिर हैं. खेलों में भी ये लोग आगे रहते हैं. जंगल ओलम्पिक का चैम्पियन अक्सर इसी कबीले से होता है.

वहीं कुछ हिंसक और लड़ाकू जातियाँ भी हैं जो गाहे-बगाहे अन्य जातियों के लिये परेशानी का सबब बनती रही हैं. ये हैं:

१. तिरांगी - सबसे खतरनाक जातियों में पहला नाम आता है तिरांगी का. पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले ये लोग वेताल शांति में विश्वास नहीं करते थे. खून-ख़राबा और हिंसा ही इनकी पहचान होती थी. सिरों के शिकारी के तौर पर कुख्यात तिरांगी नरभक्षी भी थे लेकिन वेताल ने ये सब बंद कराया. (इनसे मिलेंगे अंक १८८ 'तिरांगी के नरभक्षक' में)

२. मसाऊ - घने जंगल के बीचों-बीच निवास करने वाले मसाऊ लोग बेहद खतरनाक और कुटिल हैं. ये अक्सर अन्य जातियों को मूर्ख बनाकर उनसे सामान आदि लूटते रहते हैं. बिना किसी हिचकिचाहट के किसी की भी जान ले लेना इनके लिये बेहद आसान काम है. बाकी जंगलवाले इनसे घबराते हैं और दूरी बनाये रखते हैं. (इनसे मिलेंगे अंक ००७ 'नरभक्षी वृक्ष' में)

इनके अलावा और भी कुछ जातियाँ हैं जिनका जिक्र आता रहता है. इनसे मुलाकात होती रहेगी. लेकिन आज बस इतना ही.

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13 टिप्पणियां:

seema gupta said...

"wow very interetsing....and amezing.."

Regards

Neelima said...
This comment has been removed by the author.
मसिजीवी said...

वाह मजा आया जारी रहे

इंडियन said...

ये क्या किया आपने ? अचानक से आए और उठा के यादो के गलियारों में छोड़ आए ? भाई बहोत धन्यवाद। मन बहोत बहोत पीछे चला गया। सुखद यादें कोई चिंता फ़िक्र नही, बस अपना बचपन और अपन, अब वो फुर्सत कहाँ ?? आज से आपके ब्लॉग का प्रशंसक मै !!!

Arvind Mishra said...

मिथकीय ! फिर भी कितना वास्तविक सा है !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

हर जाति की खसूसियत उस के वातावरण और जीवन यापन के साथ जुड़ी है। अच्छा विश्लेषण है।

yunus said...

अदभुत ।
बहुत बहुत पुराने दिन और उन दिनों के दिवास्‍वप्‍न याद आ गये ।
काश कि भोपाल की इकतेदार लाईब्रेरी फिर से मिल जाए और चवन्‍नी में किराए पर ले आएं वेताल ।।

Anonymous said...

bahut badiya varnan kiya hai aapne bilkul yaaden taaza ho gayi. Pura vetal pardesh aankhon ke samne gumne laga.
-Satish

वेताल शिखर said...

seema gupta जी: धन्यवाद. आपका स्वागत है.

मसिजीवी जी: मुझे प्रसन्नता हुई. जारी रहेगा.

इंडियन जी: लगभग सभी की यही कहानी है. बचपन के मीठे दिनों को याद करने का एक जरिया हैं ये कॉमिक्स, खास तौर पर इन्द्रजाल कॉमिक्स. आप को यहां पाकर बेहद खुशी हुई.

इन्द्रजाल प्रेमियों में जुड़ने पर भी धन्यवाद.

Arvind Mishra जी: सच कहा आपने. वेताल का जादू ऐसे ही निर्मित नहीं हो गया था. उच्च दर्जे की कल्पनाशीलता का परिणाम था. आपका धन्यवाद.

दिनेशराय द्विवेदी जी: बहुत-बहुत धन्यवाद.

yunus जी: अरे वाह युनुस भाई. आपको यहां देखकर अच्छा लगा. चवन्नी में किराये पर लाकर तो हमने भी बहुत चित्रकथायें पढ़ी हैं. लेकिन.... गुजरा हुआ जमाना, आता नहीं दुबारा...

Satish जी: बहुत धन्यवाद सतीश जी.

Anonymous said...

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Siladitya said...

Did Steve Harvey copy the book title Act Like A Lady Think Like A Man

and theme from an earlier book?



Book with same title & theme copyrighted and published by Sharon P. Carson in 2003





CHICAGO, IL – Sharon P. Carson the author of the original title: Act Like A Lady –Think Like A Man, watched the February 27th episode of the Ophra show on which Steve Harvey was promoting his book of the same title. She was hoping that Steve would reveal to Oprah where he got the title and the theme for the book. It just seemed odd to her that his book had the same title and theme as her book that was copy written in 2003.



Upon subsequently purchasing the book, she found some interesting parallels and realized that it is not unusual for a high profiled person to take a great title and theme, rewrite a book and use their celebrity status to sell it. This she says happens too often to the unsung poets, authors and entrepreneurs of the world.



Steve wrote in his book that his hope was to “empower you with a wide-open look into the minds of men”. Sharon P. Carson wrote in her book in 2003 that her hope was for women to gain some insight into how men think in terms of relationships. Sharon also noted that in chapter 8 of Steve Harvey’s book titled “Why Men Cheat” he came to the same conclusion that she did in chapter 37 of her book, titled “Why would a man cheat”, and the answer was, “because they can”.



Sharon actively promoted her book before the release in January 2009 of Steve Harvey’s book, and would not like to see her promotion efforts hindered. She feels that her book has much to offer from a woman’s perspective and seeks to empower women to practice self love and tough love in relationships.



Before the publication of Steve Harvey’s book of the same title, Sharon bought the domain name: www.actlikealadythinklikeaman.com from which she has been selling her book. She has also held seminars with women at a Chicago University in promotion of her book, and can be viewed on the following youtube clip as she was being interviewed on a cable television program about her book in 2007 http://www.youtube.com/watch?v=xxVVQX15X2Y.



Mindful of all the self - published poets and authors who have a hard time finding publishers for their works, Sharon is currently consulting with attorneys regarding her options, and hopes that her book with the first and original title of Act Like A Lady Think Like A Man will finally receive the recognition it deserves for the wisdom, encouragement, and empowerment that it provides to women.

Haiku Poems said...

I like them very much.
Haiku Poems

bhart yogi said...

कामिक्स का कीड़ा कहा जाये तो कम नहीं होगा ,वेताल का भुत ऐसा सवार हुआ की आज भी दुसरो के फड्डे में टांग मारने की आदत है ,,,,,,,,,मोटो पतलू हो या डैडी जी या फिर लम्बू मोटो ,बहादुर हो या रिप केबी ,,या फिर सुपरमैन ,,,,,,,,,,सब का भुत हम पर सवार है ,,,,,,,,,,एक खोजी रिपोटर से लेकर एक प्राइवेट जासूसी एजेंसी की जिम्मेदारी सम्भाल ली है ,,,,,,,,,,अपने शहर रायपुर से लेकर देहली तक अभी भी कामिक्स के पात्रो को सजीव करने में लगा हुआ हु,,,,जय हिंद वन्देमातरम