Saturday, August 23, 2008

पढिये ये वेताल कथा इंद्रजाल कॉमिक्स से (किसी हिन्दी ब्लॉग पर पहली बार)

[update - 23/Aug/2008, 08:00 PM]

इस कॉमिक को e-book के फॉर्मेट में डाऊनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:
http://www.mediafire.com/?kwdyrxuur6o
(लगभग १.८ मेगा बाईट केवल)

यह फाइल .cbr के एक्सटेंशन में है. इसे पढने के लिए आपको एक कॉमिक बुक रीडर की आवश्यकता होगी. यह एक छोटी सी यूटिलिटी होती है जिसे आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं:

http://www.mediafire.com/?hdsjeojba0x
(केवल १.७ मेगा बाईट)

मित्रों के आग्रह पर प्रस्तुत कर रहा हूँ एक छोटी सी वेताल कथा: "जंगल का ओझा". केवल दस पृष्ठों में सिमटी इस कहानी का आनंद लीजिये. पृष्ठों के बड़ा करके देखने के लिए थम्बनेल्स पर क्लिक कीजिये.


ये कॉमिक्स सन १९८८ में प्रकाशित हुई थी। यानी आज से बीस वर्ष पूर्व। अन्य वेताल कथाओं की तुलना में कथानक कुछ कमजोर है मगर साय बैरी की ड्राइंग्स शानदार हैं।







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35 टिप्पणियां:

PD said...

पढ़ लिया जी.. मस्त.. बहुत खूब.. :)
आप कहें तो इसे एक ई-कामिक्स का रूप देकर अपने ब्लौग पर डाल दूं? .CBR फ़ारमेट वाला फ़ाईल बना कर?

Sanjeet Tripathi said...

अरे वाह, मस्त!
शुक्रिया साहेब।
और हां पी डी का आईडिया अच्छा है।

संजय बेंगाणी said...

वर्षो बाद फिर से पढ़ी...

वेताल शिखर said...

पीडी जी: मैंने बहुत जल्दी में इसे पोस्ट किया है इसलिए डाऊनलोड लिंक नहीं दे पाया. शाम तक .cbr या .cbz या फ़िर pdf फाइल का लिंक यहीं दे दूँगा. आपको कॉमिक्स पसंद आयी, जानकर खुशी हुई.

वैसे मैं स्वयं भी सीधे डाऊनलोड लिंक देना ही पसंद करता हूँ, ये पहली बार ही है कि कॉमिक्स को थम्बनेल के रूप में भी दिया है. (आप मेरे अंगरेजी ब्लॉग http://thephantomhead.blogspot.com) पर विसिट कर सकते हैं.

पंकज सुबीर said...

मैा शब्‍दों में नहीं बता सकता कि आपने क्‍या दिया है । धन्‍यवाद अब जब आपने प्रस्‍तुति प्रारंभ कर दी है तो मैं दो कामिक्‍स पढ1ना चाहता हूं एक तो मेण्‍ड्रकेक्‍स और विषधर की फुंफकार और दूसरा एस्ट्रिक्‍स और कढ़ाहे का रहस्‍य ।

वेताल शिखर said...

sanjeet जी: शुक्रिया. आपका svagat है.

वेताल शिखर said...

sanjay जी: आपको पसंद आयी. मुझे खुशी है.

वेताल शिखर said...

pankaj subeer जी: आपका aabhar. aapkee पसंद not कर lee है. जल्द ही देने का prayas करूंगा.

वेताल शिखर said...

pankaj subeer जी: sorry. the previous comment should be read as: आपका aabhar. aapkee पसंद note कर lee है. जल्द ही देने का prayas करूंगा.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

अति सुंदर! मज़ा आ गया! धन्यवाद! हिन्दी एस्ट्रिक्स मिल जाती तो आनंद कई गुना बढ़ जाता!
बहुत शुक्रिया!

वेताल शिखर said...

स्मार्ट इंडियन: astrix के लगभग sabhee कॉमिक्स english में नेट पर uplabdh हैं. हिन्दी में scanning करने में दिक्कत उसके बड़े aakar के karan है. फ़िर भी कोशिश करता हूँ. आपका svagat है यहाँ.

अनुराग said...

आपका बहुत बहुत शुक्रिया .......

वेताल शिखर said...

अनुराग जी: जानकर खुशी हुई की आपको कॉमिक पसंद आयी. कृपया आते रहिये.

डाऊनलोड लिंक भी उपलब्ध करवा दिया है और कॉमिक को पढने वाले सॉफ्टवेयर का लिंक भी. आनंद उठाइए.

दिनेशराय द्विवेदी said...

आपने तो हमें बचपन वापस लौटा दिया वही पैंतालीस साल पहले वाला।

वेताल शिखर said...

दिनेशराय द्विवेदी जी: आपकी खुशी मेरी संतुष्टी का कारण है. कृपया आते रहें.

eSwami said...

आपने तो मेरा दिन ही बना दिया!
बहुत ही शानदार डिस्प्ले टूल है .. पूरी स्क्रीन पर वेताल ही वेताल वाह! :)

वेताल शिखर said...

eSwami: धन्यवाद. आपका स्वागत है.

Anonymous said...

बहुत बहुत धन्यवाद.
-Mahesh

वेताल शिखर said...

Mahesh: You are most welcome. Keep visiting and happy reading.

Gyandutt Pandey said...

जय हो मित्र! यह तो मस्त है! बचपन लौट आया अपना।
बाकी और कब पोस्ट कर रहे हैं आप। रोज तीन चार इन्द्रजाल वाण्टेड!

वेताल शिखर said...

ज्ञानदत्त पाण्डेय जी: आपका स्वागत है. इस ब्लॉग पर रेगुलर लिखने का इरादा है, कॉमिक्स भी लगातार आती रहेंगी (हालांकि रोज की तीन चार तो मुश्किल हैं.) आपको भी अपना बचपन याद आया, जानकर बेहद खुशी हुई. कृपया आते रहिये.

Pratyaksha said...

आह बचपन , ओह बचपन । वेताल की फरमाईशी लिस्ट बढ़ायें आपकी ओर ?

वेताल शिखर said...

प्रत्यक्षा जी: जरूर बढाइये वेताल की फरमाईशी लिस्ट. जहाँ तक हो सकेगा, कॉमिक्स देने का प्रयास करूंगा. सचमुच इंद्रजाल कॉमिक्स के साथ बचपन की यादें किस कदर घुली-मिली हैं, और कितने ही सारे लोगों के लगभग एक जैसे अनुभव हैं. आपका आना अच्छा लगा. कृपया आती रहिये.

अजित वडनेरकर said...

जबर्दस्त है बंधु । मज़ा आ गया।

वेताल शिखर said...

अजित वडनेरकर जी: तो इंद्रजाल फेंस की लिस्ट में आप भी शामिल हैं! जानकर बेहद प्रसन्नता हुई. आपका हार्दिक स्वागत है यहाँ.

Comic World said...

TPH you informed about your Hindi blog very late,anyway its a nice work.I hope you will keep it up regular and long.
Friends me too is a avid fan and collector of Hindi Indrajal comics,i started with around 50+ Indrajal comics some two years back and luckily is able to collect 700+ Indrajal comics till date.
Looking for more discussions about Vetal/Mandrake here.

वेताल शिखर said...

CW: Well, you can say that dear. But it still is a new born baby yaar, only 3 posts old. Actually I haven't posted anything at TPH blog for a while, so didnot get opportunity to inform there about this Hindi blog.

Thanks for your wishes. Hoping to get regular feedback and info from you here.

- TPH

Anonymous said...

GREAT GREAT GREAT work. I dont know how to write in hindi here but thanks a lot.
Atul

वेताल शिखर said...

Atul: Thanks and welcome.

For all those (me included) who are not very proficient at writing in Devnagari fonts (hindi), google's transliteration tool is the best option.

You can visit at the following URL:

http://www.google.com/transliterate/indic

This is google's transliteration service for some of the indian languages. Typing in English (Romans) the fonts are converted to Hindi. Then you can copy-paste it any where you wish to.

Happy indrajal reading and hope to see you here again and again.

ravi gokhale said...

Wow. A new IJC blog for Hindi Indrajals.
Wish you all the best TPH and look forward to your postings in Hindi.

वेताल शिखर said...

Dr Ravi Gokhle:Thank you very much doctor saheb for your kind wishes.

As you can see from the comments, a lot many friends are interested in reading hindi indrajals. I also remember in one of your comments at TPH, you yourself had pointed out the element of nostalgia created by comics in native languages, since many of us first read these vintage things in our mother toungues only, marathi in your case.

Considering this I felt the need to start this blog, keeping in mind not only the indrajal comics in hindi but also the discussion and Remembrance of the sweet years of childhood which are long gone by.

It's very heartening to see you here. Thanks again.

Anonymous said...

o bhaiya....bachpan me pitaji aur mataji ke paise chori kar ke phantom ki comics kharida huwa yaad taja hogaya,so chweeeeet memories,bahut sukriya aap ko!

Rasesh said...

mujhe comics pasan aayi. bahut - bahut mazaa aaya. Lekin main bahadur, mandrake or vetaal ki hindi ki kai comics padna chahta hun. thank you.

mukesh butola said...

बहुत खूब!

Nilay Umredkar said...

Thanks for hindi indrajal comics. I Have Many comics but not all.I enjoy this
Nilay Umredkar Id nilayid@gmail.com