Sunday, December 14, 2008

वेताल की एक नयी रोचक कहानी वर्ष २००४ से (पहली बार हिन्दी में - वेताल शिखर द्वारा प्रस्तुत)

[Update: 15 December 2008, 10:25 AM]
मैं क्षमा चाहता हूं, पर इस कॉमिक स्ट्रिप के हिन्दी अनुवाद वाले डाउनलोड लिंक के साथ कुछ  गङबङी हो गयी थी, जो कि अब सुधार दी गयी है. अब आप दोनों वर्जन्स का आनन्द उठा सकते हैं.


महाबली वेताल और जादूगर मैन्ड्रेक जैसे कालजयी चरित्रों के रचनाकार ली फ़ॉक ने १९३४ से लेकर १९९९ (जिस वर्ष उनकी मृत्यु हुई) तक लगातार पैंसठ वर्षों तक इन दोंनो नायकों की कहानियों पर काम किया और कुल मिलाकर ६०० से भी अधिक कहानियाँ लिखीं. उनकी मृत्यु के बाद कई अन्य कलाकारों ने इन चरित्रों की कहानियों पर आगे काम किया, पर और कोई भी फ़ॉक जैसा जादू पैदा नहीं कर सका. हालाँकि बदलते समय में लोगों की रुचियों में भी कुछ बदलाव आया और कुछ हद तक यह भी एक कारण रहा कि कथानक और चरित्र-चित्रण में काफ़ी अन्तर देखने को मिलने लगा. लेकिन वेताल और मैन्ड्रेक के पुराने शौकीनों को इन परिवर्तन से अधिकांशतः निराशा ही हाथ लगी क्योंकि ली फ़ॉक की मूल कहानियों की तुलना में इनका स्वाद काफ़ी फ़ीका और कहीं-कहीं तो अजीब सा था. कई स्थान पर नये लेखकों ने मूल चरित्रों के साथ काफ़ी स्वतन्त्रता भी लेने की कोशिश की और इसका भी परिणाम कोई बेहतर नहीं निकला.

पर यह कहना भी ठीक नहीं होगा कि बाद की सभी कहानियाँ बिल्कुल ही स्तरहीन हैं. किसी किसी कहानी में रोचक तत्व भी देखने को मिल जाते हैं. और कुछ कमियों के बावजूद फ़िर भी वेताल तो वेताल ही है. जिस चरित्र को बचपन से पढ़ते और पसन्द करते आये हों, उसकी नयी कथा के प्रति कुछ न कुछ आकर्षण तो बना ही रहेगा ना. आज भी विश्व के अनेक देशों में इन कहानियों का प्रकाशन समाचार पत्रों में सन्डे या डेली स्ट्रिप के रूप में हो रहा है और इन्हें पसन्द करने वालों की एक बड़ी संख्या है.

आज की पोस्ट में वेताल की एक ऐसी ही कहानी प्रस्तुत है. इसके लेखक हैं डी पॉल और चित्र बनाये हैं ग्राहम नोलान ने. यह कहानी एक सन्डे स्ट्रिप के रूप में ४ अप्रैल २००४ से २६ सितम्बर २००४ तक छ्पी थी. हालाँकि इन्द्रजाल कॉमिक्स का प्रकाशन इससे बहुत पहले, वर्ष १९९० में ही बंद कर दिया गया था, और इस कारण यह कहानी उसमें कभी नहीं छपी.

लेकिन इस पोस्ट में मेरे लिये जो सबसे ज्यादा उत्साह की बात है वो ये कि इस कहानी के लिये अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद एवम पेनल्स के बातचीत के गुब्बारों (Dialogue Balloons) में हिन्दी शब्दों का अंकन मैंने स्वयं किया है. कुल २६ पेज की कहानी ने लगभग दो घण्टे प्रतिदिन के हिसाब से काम करते हुए भी दस दिन खर्च करवा लिये. खैर अन्तिम परिणाम सुखद ही लग रहा है, तो बस, सारी थकान दूर, मेहनत वसूल.

वेताल कथाओं के हिन्दी अनुवाद की चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं. इन्द्रजाल कॉमिक्स का हिन्दी अनुवाद बेहतरीन हुआ करता था, डायमन्ड कॉमिक्स का घटिया. मैंने कहां तक सफ़लता पायी है, पढ़ने वाले ही बतायेंगे.

तो आप लोग आनन्द लीजिये इस कथा का. हिन्दी एवम अंग्रेजी दोनों वर्जन्स के लिंक नीचे दिये हैं.

हिन्दी में वेताल सन्डे कॉमिक स्ट्रिप 
#S160 वाइकिंग किले का रहस्य
कथा: टोनी डी पॉल               चित्र: ग्राहम नोलान





















डाउनलोड करें वेताल हिन्दी कॉमिक स्ट्रिप #S160 वाइकिंग किले का रहस्य
(हिन्दी अनुवाद एवम शब्द अंकन: वेताल शिखर द्वारा)
(27 pages, 1024 px wide, 4.5 MB)
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डाउनलोड करें वेताल अंग्रेजी कॉमिक स्ट्रिप #S160 The Viking Fortress Mystery
(27 pages, 1024 px wide, 4.4 MB)

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18 टिप्पणियां:

Arvind Mishra said...

वाह स्वागत है !

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

स्वागत है.....वेताल

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत सुंदर कथा। वेताल जो प्राचीन और आधुनिक ज्ञान का संमिश्रण है। सदैव ही उस की कहानियाँ पढ़े जाने के लिए ललचाती हैं।

PD said...

bare dino baad aaye?? kahan gayab ho gaye the guru??

achchha laga padhna.. aur jab aapne itti mehnat ki hai to utsukta bhi jag gayi hai.. abhi chala download karne.. :)

Thanks

Anonymous said...

Thanks for such a wonderful attempt to translate. Will surely comment on this after reading. but first of all let me download the strip.

Übermann said...

वाह! आपको हिन्दी अनुवाद के लिए बधाई देना चाहता हूँ| हिन्दी भाषा में अपने प्रिय चरित्र को पढ़ना और भी रोचक लगता है | आपके इस परिश्रम के लिए आपका अत्यधिक धन्यवाद |

- महामानव (Übermann)

संजय बेंगाणी said...

थेंक्यू जी.

वेताल शिखर said...

@Arvind Mishra जी: धन्यवाद. आपका स्वागत है.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा जी: धन्यवाद जी. आपको यहाँ देखकर अच्छा लगा.

@दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi जी: उत्साहवर्द्धन के लिये हार्दिक धन्यवाद. आपकी उपस्थिति हमेशा प्रेरित करती है.

@ anonymous: धन्यवाद जी. आपके फ़ीडबैक की प्रतीक्षा रहेगी.

@Übermann: शुक्रिया मित्र. हिन्दी में वेताल को पढ़ने का सचमुच एक अलग ही मजा है. आशा है अनुवाद पसन्द आया होगा.

@ संजय बेंगाणी जी: स्वागत है आपका.

वेताल शिखर said...

PD Ji: Nice to see you here. Been there at my other blog but not very regular due to some work-load.

Hopefully will be posting more consistently from now on at this blog also.

Thanks for your kind gesture.

Toonfactory said...

Wahhh..Waqayi mein Adbhut...Main PD ji ke Chitthe par Guest post likha karta hoon...aur swayam Comics jagat se professionally sambaddh hoon...Graham Nolan ek pratibhashali artist hain jinka interview karne ka saubhagya mujhe prapt hua tha 2004 mein. Unhone Batman ke sabse khatarnaak Villain Bane The Demon ka sabse pehle chitran bhi kiya hai DC Comics mein...
Haal hi mein maine ek naya blog- Chitrakathaa naam se shuru kiya hai...kabhi padhaarein aur apne sujhaav/sandesh denge

Anonymous said...

Wah kya baat hai, aapne itni mehnet karke hindi anuvad kiya, bahut acha laga, badhai ho.
Saurabh

वेताल शिखर said...

Toonfactory: आपको यहाँ देखकर हार्दिक प्रसन्नता हुई. ग्राहम नोलान का काम मुझे अच्छा लगता है, रेक्स मोर्गन एम.डी. पर भी.

आपके नये ब्लॉग (चित्रकथा) पर मैं विसिट कर आया हूं. शानदार प्रयास है, जरूर प्रसिद्धी पायेगा. मेरी शुभकामनाएँ.

Saurabh जी: अगर आपको पसन्द आया तो बस मेरी सारी मेहनत वसूल हो गयी. आपका स्वागत है.

DesiGuru said...

I am yet to learn how to write in hindi on my pc. I tried with this idea of translating new Phantom comics in hindi, and done approx 10 pages of Phantom Year One (1st issue) by Frew. But was not able to continue. I used shusha font, as it was phonetic, but still was not able to write good hindi. Do let me know how to use hindi and I could contribute some new phantom comics for you.

And yes, thanks a lot for bringing it out! Love to read it in hindi. I will download it now.

Rafiq Raja said...

प्रसन्न हुआ आपकी translation पर. हिन्दी मेरी मात्र बाशा नही है, फिर भी उनपे पड़ने में मुझको बहुत शोक है. जरूर पूरे पदके फिर अपनी टिप्पणी जोदुन्गा...

रफीक राजा
Comicology
- एक चिथिरा कथा ख़जाना

संजय बेंगाणी said...

आपने काफी मेहनत की है.

कथा रोमांचक है, मगर पूराने वाली बात नहीं. चित्रों में भी खिलवाड़ किया गया है जो जमा नहीं. आपका अनुवाद अच्छा है.

वेताल शिखर said...

@ DesiGuru: Initially I was dependent on google's indic transliteration service for writing in unicode hindi font but lately I have started using baraha softwayer (http://baraha.com/). This is a small and very good tool and anyone can start using it in a minimum of time. Give it a try. Few other similar tools are also available to write in indian languages.

Thanks for your visit and comment. Very happy to see you here.

वेताल शिखर said...

Rafiq Raja: I am very happy that this small effort has succeeded in drawing attention of a serious comicologist of your caliber. Great having you here. Thanks.

वेताल शिखर said...

@ संजय बेंगाणी: धन्यवाद. सभी वेताल प्रेमी इस बात पर एकमत हैं कि इन नये कॉमिक्स में वो पहले वाली बात नहीं है. वो पुराने कॉमिक्स तो कई बार पढ़े जाने लायक हैं. चित्रांकन में भी साय बैरी को छू पाना नये कलाकारों के लिये बहुत कठिन है.

अनुवाद बहुत अच्छा नहीं हो सका है, पर ये पहला ही अवसर था. शायद आगे से और बेहतर कर पाउंगा.

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.