Saturday, July 10, 2010

गार्थ की अपनी कहानी (साथ में इंद्रजाल कॉमिक्स से गार्थ की एक लाजवाब कथा भी)

The Daily Mirror Book of Garth - 1975
आप में से कई पाठकों ने इंद्रजाल कॉमिक्स में गार्थ की कथाओं का आनन्द लिया ही होगा. अस्सी के दशक के प्रारम्भ में इंद्रजाल ने जिन नए नायकों को प्रस्तुत किया, गार्थ उनमें से एक था, पर हिन्दुस्तानी पाठकों के लिए वह इतना अनजाना भी नहीं था. हिंदी और अंग्रेजी हिन्दुस्तान दैनिक समाचार पत्रों में वह काफी पहले से छपता आ रहा था. आज हम गार्थ के चरित्र के कुछ कम जाने पहचाने पहलुओं की चर्चा करेंगे.

गार्थ की कहानियों की शुरुआत सन १९४३ में हुई जब इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाचार-पत्र डेली मिरर (Daily Mirror) ने एक नये चरित्र को कॉमिक स्ट्रिप के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया. स्टीफ़न डोलिंग (Stephen Dowling) को, जो कि उस समय के प्रसिद्ध और व्यस्त कथा लेखक और कलाकार थे, इस नये चरित्र को अमली जामा पहनाने और संवारने हेतु चुना गया. उन्होंने अपने रचे इस चरित्र को जब अंतिम स्पर्श दिया, तब गार्थ उस रूप में हमारे सामने आया, जैसा कि अब हम उसे पहचानते हैं.

गार्थ की कहानी

पहले दिन की गार्थ स्ट्रिप का दृश्य
यूरोप में स्कॉटलैण्ड के उत्तरी तट से और भी उत्तर की ओर तकरीबन १०० छोटे द्वीपों का एक समूह है. आर्कटिक वृत्त में स्थित इन टापुओं को शेटलैण्ड (Shetlands) कहा जाता है. काफ़ी समय हुआ, एक छोटी सी नौका पर बहता हुआ एक बहुत छोटा बच्चा न जाने कहां से इन्हीं में से एक टापू पर किनारे आ लगा. उस टापू पर बसने वाले एक बुजुर्ग दम्पत्ति की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने प्रेम के वशीभूत होकर उस निराश्रित बालक को अपना लिया. इस प्रकार किस्मत के सहारे उस अनाथ बालक के पालन-पोषण का प्रबंध हो जाता है. बड़ा होने पर यही बच्चा गार्थ बनता है और असीम बलशाली युवा के रूप में पहचान बनाता है.

गाला को बेहोश गार्थ मिलता है. वह उसकी देखभाल करती है.
आगे चलकर वह समुद्री सेना में शामिल होता है और अपने पराक्रम से द्रुत प्रगति करता हुआ कैप्टेन की रैंक तक पहुंचता है. एक युद्ध के दौरान उसके शिप को टॉरपीडो से नुकसान होता है और डूबते जहाज से वह एक लकड़ी के लठ्ठे पर तैरता हुआ एक टापू पर किनारे जा लगता है. (कहानी में इस टापू को ’तिब्बत’ में कहीं स्थित बताया गया था. लेकिन यहां कहानीकार की गलती पकड़ में आती है क्योंकि तिब्बत चारों ओर से भूमि से घिरा हुआ प्रदेश है. उसकी सीमा कहीं भी समुद्र से नहीं लगती). किसी चोट की वजह से वह स्मृतिलोप का शिकार हो चुका है और अपने बारे में सबकुछ भूल चुका है. वहां के कबीले की एक लड़की ’गाला’ उसे देख लेती है और उसकी देखभाल करती है. गाला की स्नेहमयी सहायता गार्थ को जल्द ही चलने-फ़िरने में समर्थ बना देती है और वह अपनी शारीरिक शक्ति को पुनः प्राप्त कर लेता है. लेकिन अब भी गार्थ को अपने पूर्व जीवन की कोई भी स्मृति नहीं है.

आस्ट्रा गार्थ की प्रेमिका है.
बाद में उसके मित्र प्रोफ़ेसर लुमियर गार्थ का मनोविश्लेषण द्वारा इलाज करते हैं और एक विकिरण गन की मदद से उसकी विलोपित स्मृति को लौटाने में सफ़ल होते हैं. इस बीच गार्थ के सम्पर्क में ’आस्ट्रा’ नामक देवी भी आती है जो गार्थ के प्रेम में पड़ जाती है. आस्ट्रा गार्थ की तब-तब सहायता करती है, जब भी वह किसी बड़ी कठिनाई में पड़ता है. (आस्ट्रा सौंदर्य की देवी वीनस का ही एक अन्य नाम है, जिसका कि जिक्र ग्रीक मिथकों में आता है.)

सन १९७१ में प्रकाशित कहानी "जर्नी इन्टू फ़ीयर" (Journey into fear) में गार्थ की पृष्ठभूमि पर एक नया एंगल डाला गया. इस कहानी के अनुसार गार्थ के एक पूर्वज धरती से परे सैटर्निस (Saturnis) नामक ग्रह के वासी थे जो एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के सिलसिले में पृथ्वी पर आये थे. उन्हें यहां किसी कन्या से प्रेम हो जाता है और इस युग्म द्वारा जिस सन्तान को जन्म दिया जाता है वही आगे चलकर गार्थ की पीढ़ी का जनक होता है. शायद गार्थ के असीम शक्तिवान होने की छवि को एक ठोस आधार देने के लिये इस प्रकार की कल्पना की गयी होगी.

अपनी बहादुरी और साहस के जलवे दिखाता गार्थ एक परम बलवान योद्धा के तौर पर जाना जाता है. दुनिया में कहीं भी, किसी भी अन्याय और अत्याचार के विरोध में खड़े होने और दुष्टों से टक्कर लेने की प्रकृति के चलते कितनी ही बार उसे जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ता है लेकिन हर बार वह मौत को धता बता कर निकल आता है. हालांकि इसमें कभी-कभी किस्मत भी अपना खेल खेलती है और उसके बचाव में मददगार साबित होती है. कहते भी हैं ना "फ़ॉर्चून फ़ेवर्स द ब्रेव".

हालांकि मुश्किल मसलों पर सलाह हेतु वह प्रोफ़ेसर लुमियर का रुख करता है, पर उसकी कथाओं में स्वयं गार्थ भी बहुत समझदार इन्सान के रूप में चित्रित किया जाता रहा है. अपने लौमहर्षक कारनामों को अंजाम देने के दौरान अधिकांश मौकों पर हम उसे ऐसी स्थिति में पाते हैं जब उसे पलक झपकते ही तुरन्त कोई निर्णय लेना होता है. ऐसे ही अवसरों पर हम उसके बुद्धि-चातुर्य का परिचय पाते हैं.

लेकिन गार्थ का व्यक्तित्व एक कुलीनवर्गीय गरिमा से आलोकित और गम्भीरता से परिपूर्ण है. उसकी शौर्य गाथाओं से गुजरते हुए हम शायद ही किसी अवसर पर उसे हंसता (यहां तक कि मुस्कुराता भी) पायेंगे. अपने मिशन और कार्य के प्रति पूर्ण-रुपेण समर्पित इस बहादुर योद्धा के कारनामों के संसार में उतरना सचमुच एक अद्भुत अनुभव से गुजरना है.

छिट-पुट

गार्थ की चर्चा हो और उसकी कहानियों में दर्शायी जाने वाली टॉपलैस सुन्दरियों का जिक्र ना आये, ये कैसे सम्भव है? पिछली कड़ी में मैंने बताया था कि सत्तर और अस्सी के दशक में हिन्दी के समाचार-पत्र में छपने वाले इन चित्रों को लेकर मुझे किस प्रकार शर्मिंदगी उठानी पड़ती थी (बचपन के दिन थे). इसी क्रम में ये जानना भी रोचक है कि फ़्लीट्वे (Fleetway) ने जब १९७५ में "The Daily Mirror Book of Garth" प्रकाशित की, जिसमें उसके प्रमुख कलाकार फ़्रैंक बैलामी (Frank Bellamy) द्वारा बनाये गये क्लासिक चित्र थे, तो उन सभी टॉपलैस महिलाओं के चित्र या तो सैंसर कर दिये गये या फ़िर उन्हें बिकिनी नुमा परिधान पहना दिये गये. कुछ वैसे ही जैसे इन्द्रजाल कॉमिक्स ने भारत में किया.

The Daily Mirror Book of Garth - 1976
लेकिन अगले ही वर्ष (१९७६ में) प्रकाशित अंक में इस प्रकाशन ने, शायद पिछले अनुभव से सीख लेते हुए, इस बार चित्रों में अपनी ओर से कोई परिवर्तन नहीं किया और सभी चित्रों को उनके मूल स्वरूप में यथावत प्रकाशित किया.

और अब हम बढ़ते हैं आज की कॉमिक्स की ओर.

कहानी:

कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं. अपराधी कितना ही शातिर और चालाक क्यों न हो, कभी-न-कभी कानून के शिकंजे में पहुंचता ही है. शायद किस्से-कहानियों और फ़िल्मों के लिये यह एक सच हो लेकिन वास्तविकता क्या है, किसी से छुपा नहीं. समाज में कितने ही ऐसे अपराधी हैं जो सबूतों के अभाव में न्यायालय से बरी किये जा चुके हैं. कभी कोई साक्ष्य नहीं मिलता तो कभी दहशत के मारे कोई गवाही देने सामने नहीं आता. ऐसे में कई बार पुलिस अधिकारी हाथ मलते रह जाते हैं तो न्यायालय मन मसोसकर.

कहानी है एक ऐसे संगठन की जिसे खड़ा किया है उच्च पदों से सेवानिवृत्त हुए कुछ ईमानदार और जज्बे वाले अधिकारियों की. ये वो लोग हैं जो अपराधियों को उनके सही अंजाम तक पहुंचाने की अपनी तमाम कोशिशों को जीवन भर नाकाफ़ी साबित होता देखते आये हैं. पुलिस की राह में आने वाली बंदिशों और कानून की अड़चनों की वजह से बड़े अपराधियों को बेखौफ़ छुट्टा घूमते देखकर इनका खून खौलता है और वे मानते हैं कि समाज की भलाई इसी में है कि सभी दुर्जनों को कैसे भी करके उनके दुष्कर्मों की सजा अवश्य दी जानी चाहिये.

प्रसिद्ध जीवाणुविज्ञानी मैक्स होलिण्डर छुट्टियों के दौरान मछलियाँ पकड़ते हुए अचानक दम तोड़ देते हैं. गार्थ और प्रोफ़ेसर लुमियर उस वक्त उनके साथ ही थे. मौत का कारण एक अनजान विषाणु (Virus) है. ये काम है ’मछुआरे’ नामक उस रहस्यमय संगठन का जिसका उल्लेख हम ऊपर कर चुके हैं. ’मछुआरे’ इस विषाणु का प्रयोग अपने काम में (यानि बड़े गिरोहबाजों और अपराधियों के सफ़ाये में) करना चाहते है. अपने संगठन की गोपनीयता बनाए रखने की खातिर वे होलिण्डर को भी मौत की नींद सुला देते हैं.

गार्थ और लुमियर को पता चलता है कि मृत वैज्ञानिक एक गोपनीय प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे थे जिसके तहत वे उसी विषाणु पर शोध कर रहे थे जिसने उनकी जान ली है. ये एक ऐसा प्राणघातक विषाणु है जो शरीर में तब सक्रिय होता है जब उसका शिकार पानी के नजदीक जाता है.

होलिण्डर की भतीजी (और सचिव) एम्मा प्रोफ़ेसर के बारे में जानकारी देती है एवम गार्थ को उनकी प्रयोगशाला दिखाने ले जाती है. यहां गार्थ की मुठभेड़ दो किराये के गुण्डों से होती है जो प्रयोगशाला को नष्ट करने के लिये मछुआरों द्वारा भेजे गये हैं. बाद में एक पब में गार्थ उनमें से एक को पहचान लेता है.

गार्थ को अपने संगठन के रास्ते की रुकावट बनते देखकर मछुआरे उसे मारने की कोशिश करते हैं. लेकिन गार्थ इन सबसे बचता हुआ इन लोगों के कानून से ऊपर उठने के प्रयासों को विफ़ल करता रहता है. धीरे-धीरे मछुआरे बिखरना प्रारम्भ हो जाता है और अंततः पूरी तरह समाप्त हो जाता है.

कुछ और भी है:

जब मैंने बचपन में पहली बार ये कहानी पढ़ी थी, तो यह देखकर आश्चर्य में था कि गार्थ आखिर बुरे लोगों का साथ क्यों दे रहा है? क्यों वो इन खतरनाक गिरोहबाजों को सावधान कर उनकी जान बचा रहा है? मछुआरों के विचार और कार्यप्रणाली ने मुझे प्रभावित किया था और मेरा यही मानना था कि वे लोग कुछ गलत नहीं कर रहे थे. बाद में जाकर ये सोच-समझ विकसित हुई कि भले उद्देश्य को सामन रखकर भी यदि बुरे काम किये जाएं तो वे आखिरकार अपराध की ही श्रेणी में आते हैं.

जो भी हो, इस जबरदस्त कहानी ने सोच को काफ़ी प्रभावित किया और कई विचारश्रंखलाओं को जन्म दिया. एक शानदार कहानी.

डाउनलोड करें खूनी फ़रिश्ते (गार्थ)
(इंद्रजाल कॉमिक्स वर्ष२०अंक१८, वर्ष १९८३)

गार्थ पर हमारी ये श्रंखला अभी जारी है. अगली कड़ी में हम गार्थ की कहानियों से जुड़े रहे विभिन्न कलाकारों (कथाकार और चित्रकार) पर बात करेंगे और समय के साथ उसकी कहानियों में क्या-क्या परिवर्तन आये, ये देखेंगे. और भी बहुत कुछ होगा, एक और गार्थ कॉमिक के साथ. तो एक बार फ़िर बहुत जल्द उपस्थित होता हूं.

आप तब तक इस कहानी पर अपने विचार बनाइये और हो सके तो हमें भी बताइये.

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17 टिप्पणियां:

मोहम्मद कासिम said...

thanks 4 providing comics

katha chatcha bhut achi lagi

PBC said...

वाह! क्या पोस्ट है, इतना अच्छा विवरण अभी तक गार्थ के बारे में नेट पे कभी नहीं मिला| वैसे गार्थ की कहानी की शुरुआत वाली स्ट्रिप, अगर
रंगीन मिल जाती तो यह भी हम सबों के लिए एक अनमोल भेंट होगी|

chaltaphirtapret said...

एकदम झक्कास ! क्या मद-मस्त अदा है लिखने की !! मुम्बईया तरीके में बिलकुल 'रापचिक बीडू' !!! जैसे ज्वालामुखी के फटने से अथाह लावा प्रवाहित होता है , ठीक उसी तरह से आपके मस्तिषक में भी लेखन रूपी लावा भरा पड़ा है जो आपकी कलम चलने पर प्रवाहित होता है , दुसरे शब्दों में "वेताल शिखर" की चोटी से लावा प्रवाहित होना शुरू हो चुका है जो अब जल्दी थमने वाला नहीं है ! ब्लॉग्गिंग की दुनिया में नए आयाम और क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले अग्रणी ब्लॉगर है "वेताल शिखर"
मैंने ज्यादातर ब्लॉगर को सिर्फ कॉमिक को पोस्ट करते ही पाया है , लेकिन कहानी के किसी भी पहलु पर चर्चा करना उन्हें गवारा नहीं , चंद अलफ़ाज़ लिखने की तो बात ही छोड़िये , परिणामस्वरूप पोस्ट 'निस्तेज' रहती है ! लेकिन TPH का कुछ लीक से हट कर करने का जनून आपकी पोस्ट को आसाधारण और लेखन को विलक्षण और 'तेजमय' बना कर वेताल शिखर की उच्चाईयों तक ले गया है और जिसके आसपास कोई अत्यंत प्रतिभाशाली ब्लॉगर ही पहुँच सकता है !
केवल अपनी दूसरी ही प्रलयंकारी "गार्थ-गाथा" के बाद अपने गार्थ को नायक से महानायक का दर्जा दिलवा दिया, बहुत खूब मेरे भाई , गार्थ की कद-काठी तो पहले से ही श्रेष्ठ थी लेकिन आपने उसके बारे में आज तक जो बातें अनकही और अनसुनी थी , उनसबसे पर्त-दर-पर्त रहस्यउध्गाटन कर के गार्थ के "हॉट व्यक्तित्व" को और भी कद्दावर बना के 'श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ' बना दिया , क्या कहने !!

गार्थ 80 के दशक में केवल "चुनिन्दा पाठकों" की पसंद के नायक रहे हैं , लेकिन TPH के इस 'दुसाह्सिक' प्रयास के परिणामस्वरूप आज यानि की जुलाई 2010 में गार्थ के साथ जो "चुनिन्दा पाठकों की पसंद" का तमगा लगा था वह वेताल शिखर की इस "मील का पत्थर" साबित हुई सनसनीखेज पोस्ट के बाद से हमेशा के लिए हट गया है और आज से जो भी पाठकगण "वेताल शिखर" पर भ्रमण के लिए पधारेंगे और "यादें बचपन की शीर्षक" के अन्तरगत गार्थ की इन हतप्रभ करने वाली पोस्ट को पड़ेंगे तो सभी पाठक गार्थ की सभी प्रकाशित कहानियां पड़ने के लिए 'व्याकुल' हो उठेंगे और पाठकों के मन्मस्तिशक में जवार तरंगे उठने लगेंगी गार्थ को और अधिक जानने की , और अगर इन पाठकों में से कुछ लड़कियां निकली तो इनकी दीवानगी गार्थ के प्रति 'उन्मादयुकत' होगी क्योंकि गार्थ की छवि है ही इतनी "हॉट" !!
अब आप सब बताइए की क़िस इंद्रजाल नायक की कल्पना आप सब अपने शहर के व्यस्ततम बाजार के बीच में करते हैं , वेताल, MANDRAKE , FLASH GORDON या फिर MIGHTY गार्थ ..........???????????????????????? निसंधेह 'गार्थ' क्योंकि न तो गार्थ नकाबपोशधारी है , न ही सम्मोहन का ज्ञाता और न ही लेसर गन से युक्त , गार्थ तो फौलादी डील डौल धारी एक आम आदमी के दिल का 'महानायक' है जिस जैसा दिखने की प्रबल इच्छा हर एक युवक की है
गार्थ के संध्रब में मुझे ROYAL ENFIELD BULLET MOTORCYCLE का विज्ञापन याद आ गया जिसका शीर्षक था "जब BULLET चले तो सब रास्ता दें" लेकिन हमारे HERCULIAN GARTH के सामने तो BULLET भी छोटा पड जाये और नया शीर्षक होगा :-
"जब गार्थ चले तो वक्त थम जाये , आंधियां अपना रुख बदल लें और रास्ते खुद-ब-खुद बन जाये " !!!
रही बात गार्थ की कथाओं में लगने वाला सुन्दरियों के हुस्न का तड़का, तो इस बारे में मैं यह कहना चाहूँगा की जैसे सुरा-सुंदरी के बिना james bond की कथाओं कल्पना भी नहीं की जा सकती ठीक उसी तरह से यह कातिल हसीनाएं इंद्रजाल के एक मात्र " HOT " महानायक गार्थ की कथाओं का अभिन्न हिस्सा हैं , क्या रूप सोंदर्य से लबालब "आस्ट्रा" के बगैर गार्थ की कल्पना की जा सकती है जिसने एक नहीं बल्कि कई बार गार्थ की मदद की है ! यूँ ही नहीं गार्थ को महानायक का दर्जा मिला जिसके पीछे बेपनाह हुस्न की मल्लिका देवी आस्ट्रा की गार्थ के प्रति असीमित प्रेम भावना भी है
गार्थ लोकप्रियता के जिस तखत का 80 के दशक में ही हकदार था वह हक गार्थ को आज जाकर मिला है , जिसका पूरा श्रेया जाता है "वेताल शिखर" को जिनके बेशकीमती 'एक प्रयास' का ही नतीजा है की गार्थ चुनिन्दा पाठकों के वर्ग से बाहर निकल पाए और आज सर्वप्रिये महानायक के रूप में उभर कर सामने आये
इस श्रृंखला की तीसरी कड़ी के दीदार के लिए मन में अभी से कोताहुल मचना शुरू हो गया है

प्रेत

Raju said...

Sir,
Though I was aware about Garth since late 80s when I came across his IJCs but I did not read them because as a 13 year old these stories of complex art style did not appeal me. Later on around mid 1990s when as a 20 year old daily strip stories of Garth attracted my attention in Hindustan Times and I started reading them day by day and then only realized how interesting these stories are. I tried to search some old IJCs featuring Garth but could not find any except Mystery at Kanchanjanga. Garth is as favourite to me as Phantom is. In fact I like his comics more than comics of Mandrake. My only regret is that I did not collect those daily strips or Garth comics. At that time it never occured that these stories would not be available in future. Do you have Mistress Orange published somewhere in the year 1997 in your collection. If you have please send me its scans. I am not able to download any comics because the only computer I have is provided by my office and administrator does not provide facility to download. If possible send me scancs of comics posted by you:-
wiseboy008@gmail.com
As rightly pointed out by Pret your presentation while posting a comic is febulous. The trailor you provide increase the eagerness to read the comics. I am still waiting for the concluding parts of story you had begun. (Professor sotry).
In the end Penguin India announced publication of entire Garth Strips but nothing came out of this. They postponed it sine die.

वेताल शिखर said...

@मोहम्मद कासिम: स्वागत है डियर. आते रहा करिये.

वेताल शिखर said...

@PBC: हां, लम्बे समय से इच्छा थी कि गार्थ पर कुछ विस्तार से लिखूं. अब जाकर कुछ हो पाया है. अगली कड़ी संभवतः अंतिम होगी, फ़िलहाल के लिये.

मेरे पास पहली स्ट्रिप के कुछ ही हिस्से हैं. पूरी कहानी नहीं है, और जितनी है वो भी कम रिसोल्यूशन में है. इस कारण रंगीन करने में दिक्कत है. फ़िर भी देखते हैं क्या हो सकता है.

वेताल शिखर said...

@प्रेत: भाई आप अगर ऐसे तारीफ़ करेंगे तो मैं थोड़ा ऍम्बैरेस फ़ील करुंगा. आपके लिखने का अंदाज बेहद जोशीला है, पढ़ने वाले को झकझोर देता है. बड़े दिलकश अंदाज में लिखते हो आप.

हां, गार्थ को ’हॉट’ नायक कहना बिल्कुल सही होगा. उसकी पर्सनॅलिटी किसी भी अन्य इंद्रजाल नायक के मुकाबले बीस ही बैठती है (फ़्लैश के अलावा). वेताल को गिनती में नहीं लेते क्योंकि एक तो वो विवाहित है और दूसरे अपने कॉस्ट्यूम की वजह से वास्तविक संसार से दूर ही भला. :-)

गार्थ की कुल १६७ कहानियाँ हैं जिनमें से मात्र १४ ही इंद्रजाल ने प्रकाशित की थीं. जो नहीं कीं उनमें से कुछ बहुत शानदार कहानियां हैं. काश वे भी कभी पढ़ने को मिल सकें. साठ और सत्तर के दशक में कुछ बहुत बढ़िया कहानियां आई थीं. फ़्रैंक बैलामी के चित्रों को भी क्लासिक माना जाता है. बड़ी हसरत है उनमें से कुछ पढ़ने को मिलें.

अगली कड़ी के लिये तैयारी में हूं.

वेताल शिखर said...

@Raju: राजू भैया, आपकी कहानी सुनकर भी अच्छा लगा.

writing said...

Excellent effort. Always wanted to read Garth online.
Do you have strips of Garth in Hindustan times and Hindi Hindustan in the year about 1970 or so?
the Face of Garth in those days was different. Who was the artist?
Please try to find those comics. Only you can do it.
I even collected those daily strips for a complete story. Long back and lost.
thanks again
deshdeepak

sweatha said...

We are proud of inviting you to the the internet's best Social community. www.jeejix.com .

sweatha said...

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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Bandhu,aapka kin shabdo me dhanyavaad karoo,aapney poora bachpan fir sey jinda kar diya ,bhagvan karey aap aisey hi naye naye matlab bahut puraney par sada naveen kathanak latey raho
swagat,hardik aabhar ,dhanyavaad bhi
dr.bhoopendra singh

Mehak said...

बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

Thanks
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Harman said...

bahut hi badiya..
Please visit my blog..

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Mohit Raghav said...
This comment has been removed by a blog administrator.
anil kumar said...

Adult Comics this is for entertainment comix site you can read many stories. if you want enjoy with this comex (http://comixxxstore.com/) site please visit this site and you may go to contact page. Heroines in Peril

Vyoma Mishra said...

super...ihave some comics of Garth
which i didnt like in my choldhood, but nowadays i read him...