Monday, April 26, 2010

सभी कॉमिक्स प्रेमियों के लिये एक प्रेम भरा उपहार (वेताल और मैण्ड्रेक की कुछ कालजयी कथाएँ)

First Page of Phantom Daily D060 - The Wisdom of Solomon
रंग किसे आकर्षित नहीं करते? प्रकृति ने इन्सान को जो तमाम नियामतें बख्शी हैं, उनमें से एक बड़ी काबिलियत विभिन्न रंगों के मध्य सूक्ष्म विभेदन करने और उन्हें बारीकी से पहचानने की क्षमता भी है. बिना रंगों के सम्पूर्ण सृष्टि किस तरह अनाकर्षक नजर आएगी, सोच कर ही अजीब सा लगता है.

तरह-तरह के लुभावने रंगों का आकर्षण कितना मनोहारी होता है. बात चाहे बगीचे में खिले रंग-बिरंगे फ़ूलों की हो, या फ़िर आंगन में या घरों की छतों पर चहचहाते पक्षियों की, मानव जीवन में आनन्द तो रंग ही भरते हैं.

बचपन में घर में दैनिक हिन्दुस्तान पेपर आता था. इसमें नित्य गार्थ की तीन-चार पैनल वाली कॉमिक पट्टी छपती थी. रविवार के दिन मैण्ड्रेक और ब्लॉन्डी की स्ट्रिप आती थी. लेकिन ये सभी स्ट्रिप केवल श्वेत-श्याम होती थीं. सीमित पाठक विस्तार वाले और अल्प दाम में बिकने वाले समाचार-पत्र, उस जमाने में रंगीन चित्रों को छापने का खर्च वहन करना शायद उतना आसान नहीं पाते होंगे.

लेकिन यही कहानियाँ अपन फ़िर बाद में इन्द्रजाल-कॉमिक्स में पढ़ते थे और रंगीन छपाई में इनका मज़ा वाकई कई गुना हो जाता था. हालांकि रंगीन छपाई की तकनीक उस जमाने में आज की तरह उन्नत नहीं थी और व्यवसायिक बंदिशों के चलते कई बार कॉमिक की रंग भराई भी मामूली स्तर की ही होती थी, कारण चाहे अच्छे कलाकारों की अनुपलब्धता हो या फ़िर प्रकाशक की छपाई के खर्च पर अंकुश लगाने की कोशिश. लेकिन फ़िर भी रंगों का आकर्षण चुम्बकीय होता था.

कुछ वर्ष हुए, जब मैंने अन्तर्जाल पर कुछ पुरानी कॉमिक्स को पाया. लगा जैसे बचपन के दिन एक बार फ़िर सामने आकर खड़े हो गए हों. मन एक बार फ़िर उन्हीं सुहानी यादों के सागर में गोते लगाने लगा. कोई तीन वर्ष पहले मैंने अपना कॉमिक्स आधारित ब्लॉग बनाया और अपने पास अब तक सहेज कर रखी हुई कई सारी कॉमिक्स को इस ब्लॉग पर चढ़ाना शुरु किया. कोई सत्तर के आसपास कॉमिक्स अब तक मैं अपने ब्लॉग पर लगा चुका हूं. इस बीच और भी कई मित्रों ने अन्तर्जाल पर कॉमिक्स देना शुरु कर दिया और काफ़ी बड़ी संख्या में अब कॉमिक्स आसानी से यहां मिलने लगे.
Phantom Sunday S 136

ऐसे में कुछ नया करने का विचार आया. मैंने देखा था कि वेताल और मैण्ड्रेक की कई सारी पुरानी कहानियाँ ऐसी हैं, जो किसी कॉमिक बुक की शक्ल में कभी भारत में (या विश्व में कहीं भी) नहीं छपी थीं. अन्तर्जाल पर ये केवल ब्लैक एंड व्हाइट स्कैन के रूप में उपलब्ध थीं और सो भी केवल अंग्रेजी में. मन में एक विचार आया कि क्यों ना इन शानदार कहानियों को रंगीन करके कॉमिक्स प्रेमियों के लिये पेश किया जाए. और मैंने जल्द ही इस दिशा में कदम उठा लिया.
Mandrake Daily D017

अपने पहले प्रयास हेतु मैंने वेताल की एक ऐसी कहानी को चुना जो भारत में इन्द्रजाल कॉमिक्स का प्रकाशन बंद होने (वर्ष १९९० में) के बाद विदेशों में प्रकाशित हुई थी और हिन्दुस्तानी पाठकों के लिये अनजान थी. यह थी वेताल की रविवारीय कथा संख्या १३६ - The Return of Thuggees. पहले पहल दस पृष्ठ रंगीन करके मैंने पाठकों के सम्मुख रखे और इस पर उनकी प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया. सभी मित्रों ने उसे हाथों-हाथ लिया और जमकर पीठ थपथपाई. इस हौसले के टॉनिक पर काम करते हुए धीरे-धीरे करके पूरी कहानी रंगीन कर दी गयी और फ़िर सम्पूर्ण कथा एकल कड़ी के रूप में ब्लॉग पर पोस्ट की गयी.
Phantom Sunday S040

काम काफ़ी मुश्किल था. क्योंकि एक तो ग्राफ़िक्स सॉफ़्ट्वेयर के क्षेत्र में अपनी पहले से कोई विशेष दखल नहीं था और फ़िर शुरुआती जोश के असर में आकर मैंने एक ऐसी कहानी का चुनाव कर लिया था जो अत्यधिक रूप से लम्बी थी. ये पूरी कहानी पैंसठ (६५) पृष्ठों तक फ़ैली थी [सामान्य कहानी पच्चीस पृष्ठों तक की होती है] और प्रत्येक पृष्ठ रंगहीनता का दामन छुड़ाकर रंगीन चोला पहनने में चार से पाँच घण्टे का समय ले लेता था. धैर्य और समर्पण की ऐसी कड़ी परीक्षा पहले कभी नहीं हुई थी. लेकिन अंतिम परिणाम देखकर सारी मेहनत वसूल होती प्रतीत हुई. और फ़िर इसके बाद तो एक सिलसिला शुरु हो गया. जल्द ही कुछ और कहानियाँ रंगीन कर दी गयीं.

इनमें से कुछ कहानियाँ निम्न लिंक्स पर डाउनलोड के लिये उपलब्ध हैं. कृप्या वहां से डाउनलोड कर इनका आनन्द लें.

१) वेताल रविवारीय कॉमिक स्ट्रिप १३६ - Return of Thuggeess (१९९१)
२) वेताल रविवारीय कॉमिक स्ट्रिप ०४० - The Gibs Brothers (१९५५)
३) मैण्ड्रेक डेली कॉमिक स्ट्रिप ०१७ - The Deep South (१९३९)*
* Partially done so far.

इस बीच मैंने अपनी ओर से एक और नया प्रयास किया है और वेताल की एक बहुत पुरानी कहानी [डेली स्ट्रिप ०६० - The Wisdom of Solomon (वर्ष १९५५)] को ना सिर्फ़ ब्लैक एण्ड व्हाइट से रंगीन में तब्दील किया है बल्कि उसे हिन्दी में अनुवादित करके हिन्दी संवादों के साथ पेश करने का प्रयास किया है. उन कॉमिक्स प्रेमियों को, जो अपने बचपन के दिनों में हिन्दी इन्द्रजाल-कॉमिक्स (या किसी और स्त्रोत से वेताल और मैण्ड्रेक) पढ़ते रहे हैं, मेरा यह प्रयास अवश्य भायेगा, इसका मुझे विश्वास है.

एक बात जो इस कॉमिक को विशेष बनाती है वह यह कि इस कहानी को कभी भी भारत में किसी भी प्रकाशन द्वारा कभी प्रकाशित नहीं किया गया. इस कारण अभी तक भारतीय पाठक इससे अछूते ही रहे हैं. अब रंगीन चित्रों के साथ इस कहानी का आनन्द उठा सकते हैं. सचमुच बड़ी मजेदार कथा है और इसे पढ़कर आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि वेताल आखिर इतना लोकप्रिय चरित्र कैसे बन गया होगा.

दोनों भाषाओं (अंग्रेजी एवम हिन्दी) के कॉमिक्स के लिंक्स नीचे हैं. आप जिस रूप में भी पढ़ना चाहें डाउनलोड कर सकते हैं.

वेताल डेली स्ट्रिप ०६० - The Wisdom of Solomon (वर्ष १९५५)
Phantom Daily D060

१) अंग्रेजी में ब्लैक एण्ड व्हाइट 
२) अंग्रेजी में रंगीन चित्रों के साथ
३) हिन्दी में रंगीन चित्रों के साथ

यदि आप डाउनलोड कर रहे हैं तो अनुरोध है कि कृपया अपनी प्रतिक्रिया से भी अवश्य अवगत कराएं. रंग भराई और अनुवाद दोनों के विषय में आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे मेरे भविष्य के काम में सुधार करने में सहायक सिद्ध होंगी. उनका स्वागत है, अग्रिम धन्यवाद के साथ.


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24 टिप्पणियां:

गिरिजेश राव said...

बहुत बहुत बढ़िया। आप तो मुझे बचपन में ले गए।
डाउनलोड करते हैं जी।

seema gupta said...

सच में हमे भी बचपन याद आ गया...बहुत पढ़ते थे इन कहानियों को....
regards

PBC said...

It's an unique attempt.

If you can keep terms used in Hindi IJC & provide translation as earlier issues, it'll be best gift for Hindi fans.

English are everywhere available, Hindi was missing.

Keep it up!

PD said...

गजब दोस्त.. बहुत मेहनत किया है आपने इन सब पर..

पर आपसे एक शिकायत है.. आपने "प्रोफ़ेसर का रहस्य" को आधे पर ही छोड़ रखा है.. :(

PBC said...

Same view about colours, better to keep as IJC. If possible as earlier issues.

Although these are good also.

Some words in English version are bold, if possible need to keep in Hindi as author.

and Sasuri Nadi.... :)

वेताल शिखर said...

@ गिरिजेश जी: स्वागत है आपका.

@ सीमा जी: जी हां मुझे पता है कि आप भी इन्द्रजाल की पाठक रही हैं, बचपन में.

@ पीडी: धन्यवाद. आपको अब तक याद है, मुझे देखकर अचरज हुआ. हां आगे बढ़ाने की बड़ी इच्छा तो है पर अब तय किया है कि पूरी कहानी समाप्त करने के बाद ही ब्लॉग पर टांगूंगा. ताकि एक बार फ़िर शुरे होने के बाद रुकने की नौबत ना आए.

वेताल शिखर said...

@ PBC: Thanks and you are welcome. I have tried to follow the path of Indrajal as far as translation is concerned. But you would agree that it is not easy to match the standards of those experts. Never the less, I am noting down your valuable suggestion and once again going to read at least the first 50 issues all again, so as to be more friendly with the terms used by indrajal translators.

But I once again like to mention that I have tried my best to make the hindi version as independent as I could. The dialogues are not mere word to word translation of english but I tried to put local flavour.

'Sasuri Nadi' is a really funny. Initially I was hesitant to put it, specially because it was spoken by Phantom and I wasn't not completely sure how would it suit to Phantom's personality. But then..., and I think people are enjoying it. My wife is another to say that.

In colouring, some deviation is inevitable, though very limited. I tried to use some colours which (I hoped) could look attractive but at the same time not straining to the eyes.

Will try to make it more of your liking next time.

Comic World said...

प्रशंसनीय प्रयास,खासतौर से हिंदी-अनुवाद जो की खुद मेरा भी सपना रहा है..कारण,आरंभिक इंद्रजाल कॉमिक्स के हिंदी अनुवाद का निम्नस्तरीय होना जो की अधिकतर शब्द-दर-शब्द अंग्रेज़ी अल्फाज़ों का हिंदी अनुवाद मात्र था.एक ऐसी ही स्ट्रिप पर काम चल भी रहा है परन्तु कछुआ-रफ़्तार से.
समस्त स्ट्रिप्स रंग और हिंदी अनुवाद के साथ..ये एक ड्रीम प्रोजेक्ट है,जो समुचित कोशिशों द्वारा ही पूरा हो सकता है,देखते हैं कब हक़ीकत की शक्ल इख़्तियार करता है.
बात करते है आपकी स्ट्रिप की हिंदी अनुवाद की तो यदि वेताल के संवादों की बात की जाये तो वो उसकी कद्दावर एवं प्रभावशाली शख्सियत से मेल खाते हुए प्रतीत नहीं होते,फिर भी McCoy के वेताल पर इस किस्म के संवाद('ससुरी नदी')चल सकते है पर मूर और बैरी के वेताल के बारे में हम संवादों में हल्कापन सोच भी नहीं सकते.
बांदार बौनों और दूसरी जंगली जातियों के लिए बहुत ज़्यादा क्लिष्ट संवाद रखने से परहेज़ करना होगा और आम बोलचाल वाली भाषा का इस्तेमाल ही करना होगा क्योकि अधिकतर तो उनमे अनपढ़ है जो आम बोलचाल वाली भाषा ही प्रयोग में लाते होंगे.
बहरहाल,एक कलात्मक प्रयास जो भविष्य में निश्चय ही और उंचाई प्राप्त करेगा,ऐसी आशा है.

वेताल शिखर said...

@ CW: शुक्रिया ज़हीर अंकल. [अंकल शब्द आजकल कॉमिक ब्लॉगिंग में फ़ैशन में है. मैंने देखा कर्नल वोरोबू भी अभी किसी को अंकल कह रहे थे. :o)

तुम्हारी टिप्पणी की कुछ बातों से मैं सहमत हूं, कुछ से नहीं. जहां तक प्रारम्भिक इन्द्रजाल के हिन्दी अनुवादों का प्रश्न है, तुम्हारा ये कहना बिल्कुल सच है कि वे क्लिष्ट हैं और अनुवाद कला के कोई उच्च प्रतिमान नहीं स्थापित करते. इस मामले में डायमण्ड कॉमिक्स के अनुवाद का भी यही हाल है. वे केवल भाषाई शब्दार्थ हैं, भावार्थ नहीं. स्थानीय स्तर पर हिन्दी पाठकों से बेहतर जुड़ाव के लिये इन्द्रजाल ने बाद के दशक में बेहतर अनुवादकों से काम लिया, जिन्होंने कई सारी नयी terms का हिन्दी कहानियों में प्रयोग किया. इन पर एक अलग से पोस्ट बनती है. जल्द लिखूंगा.

जहां तक प्रस्तुत कथा की बात है, मुझे नहीं लगता कि वेताल के सम्वाद कहीं से भी हल्के और गैर-प्रभावशाली हैं. असल में कहानी ही कुछ ऐसी है कि वेताल लगभग पूरे समय एक तनाव की अवस्था में है. कबीलों में शांति कायम रखने के उसके सभी प्रयास एक के बाद एक असफ़ल साबित हो रहे हैं और समय बीतने के साथ युद्ध का खतरा बढ़ता ही जा रहा है.

मैंने ली फ़ॉक के सम्वादों को पूरी शिद्द्त से हिन्दी में ढालने का प्रयास किया है. अनुवाद केवल शब्दानुवाद बनकर ना रह जाए इसकी पूरी कोशिश की है. प्रयास यही रहा है कि सम्वादों में लोकल फ़्लेवर उभर कर आये लेकिन मूल सम्वाद से बहुत ज्यादा deviation भी ना आ जाए.

मुझे नहीं लगता कि ’ससुरी नदी’ कहकर वेताल किसी गिरावट का प्रतीक बन रहा है. अंग्रेजी में शब्द था "Darned River". ये बहुत आवश्यक था कि मैं वेताल की मनोदशा को दर्शाने वाले उस डायलॉग को कहानी में यथास्थान बनाए रखूं ना कि उसे किसी अन्य से बदल डालूं. इसी लिये इस रूप में रखा.

मैं कुछ मिलाकर इस स्ट्रिप के अनुवाद से काफ़ी सन्तुष्ट हूं.

बांडार बौनों और अन्य कबीले वासियों को ज्यादा उच्च भाषायी सम्वाद नहीं दिये जाने चाहिये, तुम्हारी इस बात से भी सहमति है. ऐसे मामलों में स्वयं ली फ़ॉक को फ़ॉलो करना पर्याप्त होगा.

जहां तक सवाल रंगों का आता है तो वहां भी मेरा ख्याल है कि काम अच्छा ही हुआ है. एक दो जगह पर जो ज्यादा तीखे रंगों की शिकायत थी, वह भी दूर कर दी गयी है. कॉमिक्स एक फ़ैंटेसी होती है. रंगों के मामले में थोड़ी स्वतंत्रता हर कलाकार ले लेता है, चलता भी है.

S136 - Return of thuggees के अंतिम पन्द्रह-बीस पृष्ठों की colouring मेरा अब तक का सबसे अच्छा काम है. लेकिन इस स्ट्रिप में (D060) अगर समय निवेश की दृष्टि से देखा जाए तो बढ़िया काम हुआ है. बीस पेज की पूरी स्ट्रिप केवल पन्द्रह-बीस घण्टों में ही समाप्त कर ली गयी है.

एक और बात बता दूं. एक और क्लासिक फ़ैंटम स्ट्रिप (इस बार एक ’रे मूर’ के ब्रश से) पूरी तरह तैयार है. रंगाई हो चुकी है, हिन्दी अनुवाद बकाया है. दोनों वर्शंस साथ ही पेश करूंगा.

अंत में फ़िर एक बार शुक्रिया कहूंगा.

Comic World said...

मनीष भाई,आपने मुझे 'अंकल' कह कर संबोधित किया,आश्चर्य,क्योंकि अंकल आमतौर से इन तीन स्थितियों में ही प्रयुक्त होता है:
1.पिता समान या उनकी आयु के किसी व्यक्ति को सम्मान सहित संबोधित करते समय
2.किसी को ये बताते हुए,कटाक्ष स्वरुप,की अब आप का ज़माना गया और आप outdated हो गए हैं
3.किसी की ऐसी बात से चिड़कर जो हमें फालतू का उपदेश या ज्यादा ज्ञान बखारने वाली या फालतू की नसीहत प्रतीत हो
अब चूँकि मैं आपका हमउम्र हूँ इसलिए पहली स्थिति तो मुझ पर लागु नहीं होती और अगर दूसरी या तीसरी स्थिति के बारे में सोचा जाए तो मैं ये सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ की क्या मेरी कोई बात('टिपण्णी') आपको बुरी लगी जिसकी परिणिति उक्त संबोधन के रूप में हुई!!
मैं आपके कार्य और सुझावों का प्रशंसक हूँ इसलिए आपके कार्य पर बारीक नज़र रखते हुए स्वस्थ मानसिकता से समालोचिक टिप्पणियां करता हूँ जिनका उद्देश्य सिर्फ़ आपके कार्य की समीक्षा और प्रोत्साहन मात्र है,फिर भी अगर कोई बात आपको अन्यत्र,अप्रासंगिक एवं कठोर लगी हो तो मैं दिल से माफ़ी का तलबगार हूँ.
जहा तक मौजूदा स्ट्रिप में वेताल आदि के संवादों का प्रश्न है तो उनसे मेरी सहमति/असहमति अप्रासंगिक है क्योंकि ये आपका ब्लॉग(आलेख) है और आप ही इसके अच्छे बुरे के निर्णयकर्ता और ज़िम्मेदार हैं.
खैर,वापस वेताल की बात करते हैं,वेताल जैसे शालीन,मर्यादा-पुरुष और कुलीन हीरो के मुख से 'ससुरी नदी' कुछ हल्का नहीं लगता!'darned river' को हम 'कमबख्त नदी' भी कहलवा सकते हैं.
बहरहाल,'मूर' की स्ट्रिप का इंतज़ार रहेगा क्योंकि मूर के रहस्मयी ब्रुश पर किस तरह के रंग चढ़ाते है आप ये देखने वाली बात होगी.

PD said...

वैसे सच कहूँ तो "ससुरी नदी" मुझे भी कुछ हजम नहीं हुआ था..

PD said...

और हाँ.. हम तो पिछले दफ़े से जितनी बार यहाँ आये हैं हर बार उस कहानी के अगले अंक के लिए ही, जिसे आपने अधूरा छोड़ रखा है.. :)

वेताल शिखर said...

@ CW: अरे जहीर भाई, बड़ा गहन मनोविश्लेषण कर डाला आपने तो. मैंने तो अपने कथन के साथ सन्दर्भ भी इंगित किया था पर आप तो अन्यत्र ही सोच में उलझ गए. मुझे नहीं लगता कि आपके गिनाए तीनों कारणों में से कोई भी इस केस में उचित बैठता है. सिर्फ़ हंसी में कही गयी बात को इस कदर भी गम्भीरता से क्या लेना? कर्नल वोरोबू ने हाल ही में प्रभात को प्रभात अंकल कहा था और उस पर कोई बहस नहीं छिड़ी. खैर छोड़िये.

आपके रचनात्मक सुझावों की मुझे सदा प्रतीक्षा रहती है. इस बार भी अच्छा लगा. लेकिन एक बात मुझे खटकी वो ये कि आपने सिर्फ़ एक सम्वाद के बहाने वेताल के सभी सम्वादों को हल्के स्तर का बता डाला.

’कम्बख्त नदी’ शब्द मेरे भी ज़हन में आया था, लेकिन मैंने ’ससुरी नदी’ को उस पर तरजीह देना मुनासिब समझा. कारण ये है कि ’कम्बख्त’ एक गाली है और वेताल गालियों का उच्चारण करे ये उचित नहीं लगता. फ़िर तो शायद ’साली नदी’ भी चलेगा. :-)

ससुरी शब्द आपको निचले स्तर का लगा, शायद हो भी, लेकिन मेरे विचार से ये उस समय की वेताल की मानसिक स्थिति का प्रभावशाली ढंग से प्रकटन करता है. एक खीजा हुआ, बौखलाने की हद तक परेशान वेताल, अपने सभी उपायों को एक-एक करके निष्फ़ल होता देखकर सर के बाल नोंचने पर उतारू वेताल. ऐसे में कुछ अजीब बोल मुंह से निकलना स्वाभाविक ही है.

आपने लिखा है कि सम्वादों से आपकी सहमति/असहमति अप्रासंगिक है. कदापि नहीं. आपके जैसे अच्छे लिक्खाड़ों से मिले सुझावों से मैं हमेशा ही लाभ लेने को तैयार रहता हूं, सो उनका हमेशा स्वागत है, धन्यवाद के साथ.

आपके किये अनुवाद को देखने का भी बड़ा ख्वाहिशमंद हूं. इस कछुए-रफ़्तार को कुछ गति प्रदान करें ताकि हमारा अरमान जल्द पूरा हो सके.

मूर की स्ट्रिप पर काम शुरु कर रहा हूं, आज ही.

वेताल शिखर said...

एक बात कहना भूल गया. इसी कहानी में अन्यत्र कहीं फ़िर एक बार ऐसी ही स्थिति बनी है और वहां मैंने वेताल के कथन में ’अभागी नदी’ शब्द इस्तेमाल किया है.

ये काफ़ी बाद का scene है और तब तक वेताल लगभग हार मान चुका है. इसी के बाद अप्रत्याशित रूप से उसे गुर्रन से एक सलाह मिलती है (अनजाने में ही सही)

Comic World said...

मनीष भाई,चूँकि मैं कर्नल वोरोबू-प्रभात प्रकरण से अनिभिज्ञ था इसलिए आपके कथन के भाव को समझ नहीं सका,खैर छोड़िये.
'कमबख्त' कोई ऐसा कठोर एवं निम्न स्तर का शब्द नहीं है जो उक्त सन्दर्भ में प्रयुक्त न किया जा सके,बहरहाल,ऐसा नहीं था की मुझे वेताल के सारे संवाद हलके लगे सिर्फ 'ससुरी नदी' थोड़ा वेताल की प्रभावशाली शख्सियत से मेल खाता प्रतीत नहीं हुआ,बाकि सारे संवाद भावों के अनुकूल हैं.
काम में देरी का सबब एक वृहद स्ट्रिप का चुनाव है,चूँकि मैं नहीं चाहता की सिर्फ कुछ पन्ने ही आपके सामने पेश करूँ इसलिए इंतज़ार में हूँ की कब वो 50+ पन्नो की स्ट्रिप पर काम ख़त्म होकर आप सब के सामने आये.

Mr. Walker said...

nice post..bahut badiya..dhayanabaad..

by the way, somebody is selling our eng & hindi indrajal scans in name of his own for buissness purpose..the person himself is a blogger..really very bad thing..he should be ashamed of himself..

AJAY said...

Hello Manish

Really a very nice effort as well totally different approach too . When I was samall I got #4 in English , was running a library so English was mostly difficult language so translated in Hindi , pasted on English Baloons, people liked that very much .
I love your coloring efforts very much .

Thanks a lot for all your efforts though I also wanted to do the same but lite at our place is hindrance .

वेताल शिखर said...

@Mr. Walker: Welcome Mr. Walker. Thanks for appreciating comment.

Yes, I came to know about this incident through Prabhat's mail. It's quite shocking and saddening. Vishal has incurred monetary losses. Hopefully he if fully paid back all the money he has been robbed by this so called ardent indrajal fan.

वेताल शिखर said...

@ Ajay: Welcome Ajay and thanks.

It gives feeling of satisfaction to see some creative effort being accepted by all phantom fans like this.

Hopefully I shall continue with colouring of more strips.

thanks again for encouraging words.

Comic World said...

मनीष भाई कहा हैं आप?एक मेल लिखा था आपको काफी वक़्त पहले,अब तक कोई जवाब नहीं,कुछ ज़्यादा ही मसरूफ हैं क्या?

akfunworld said...

Sach me bhai maja aa gaya.Maine aapke is prayaas ke baare me aaj hi jaana aur jaanke bahut khushi hui ki aap jaise log bhi yahan hain.
Vaise aapke is kaam se mujhe bhi ye prerna mili hai ki kyon na mai bhi kisi english comics ka jo ki hindi me naa chapi ho uska hindi me anuvaad karun. Vaise ek character hai meri nazaron me, wo hai Asterix. Vaise asterix ki 6 comics ka hindi me translation hua hai par uske baad pata nahi kyo band kar diya gaya.
So ab mai jaroor ispe kaam karunga aur December tak 1 comics to translate kar hi daloonga

Ravi sindhav said...

आपने बीते हुवे दिनो की यादे ताजा करवा दी।
आपका रवि।

Ravi sindhav said...
This comment has been removed by the author.
वेताल शिखर said...

जानकर खुशी हुई रवि जी.