Monday, September 29, 2008

साँपों की देवी (भाग १) - एक शानदार वेताल कथा वर्ष १९८८ से

काफी लंबे अन्तराल के बाद आज मैं लेकर आया हूँ एक और वेताल कथा. ये इंद्रजाल कॉमिक्स के प्रकाशन के अन्तिम दिनों से है, यानी कि १९८८ से. कहानी दो भागों में है और आज इसका पहला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ.

घने जंगल में कई कबीले निवास करते हैं जो आपस में अविश्वास के माहौल में जीते हैं. अक्सर उनमें छोटी-मोटी तकरार होती रहती है जिसके कभी भी बड़ी लडाई में बदल जाने का अंदेशा बना रहता है. वेताल ने नियम बनाकर आपसी मतभेदों को बातचीत से सुलझाने का प्रावधान बनाया हुआ है जिसे वेताल शान्ति कहा जाता है लेकिन कभी कभी स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि समूचे जंगल की शान्ति को खतरा पैदा हो जाता है.

कुछ ऐसी ही कहानी है प्रस्तुत कॉमिक्स में. कोई सौ वर्ष पूर्व जंगल में निवास करने वाले एक समृद्ध कबीले 'दोनैइ' के लोगों को बाकी जंगलवासियों ने ईर्ष्या के चलते रहस्यमय और खतरनाक दलदल की और धकेल दिया था. जंगलवासियों का ऐसा सोचना था कि दोनैइ लोग दलदल में धंस कर समाप्त हो गए. लेकिन असल में ऐसा हुआ नहीं. कुछ दोनैइ बचे रहे और उनके वंशज अब उस ज्यादती और अत्याचार का बदला लेने के लिए तैयार हैं. एक नायाब तरीके से वे अन्य कबीले वालों को आपस में लड़ाकर कमजोर करने का षड्यंत्र रचते हैं. वेताल के लिए इस रहस्य का पता लगाना और उसकी सच्चाई सामने लाना चुनौती भरा काम है. आगे आप ख़ुद पढ़िए.

इंद्रजाल कॉमिक्स V25N27 साँपों की देवी (भाग १) - वेताल कथा (वर्ष १९८८)
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12 टिप्पणियां:

Udan Tashtari said...

बड़ी पुरानी याद करा गये!!

seema gupta said...

"after a long time.... read this story in my childhood, but enjoyed reading it again"

Regards

Gyandutt Pandey said...

जीयो मित्र, हमने दन्न से डाउनलोड किया। अब इत्मीनान से पढ़े-पढ़ायेंगे।

संजय बेंगाणी said...

मुझे तो लगा आप भूल भाल गए, अब कॉमिक पढ़ने को नहीं मिलेगी.

Arvind Mishra said...

अरे वाह पूरी कामिक्स ही यहाँ है ! मेरी बचपन की ढेर सारी यादें इससे जुडी हैं !

दिनेशराय द्विवेदी said...

धन्यवाद। दूसरी कड़ी जल्दी।

वेताल शिखर said...

@ उड़न तश्तरी जी: धन्यवाद. आशाः है आपको पसंद आयी होगी.

वेताल शिखर said...

@ सीमा गुप्ता जी: जानकर खुशी हुई कि आपको अच्छा लगा.

वेताल शिखर said...

@ ज्ञानदत्त पाण्डेय जी: जरूर आनंद उठाइए. जानकर खुशी हुई.

वेताल शिखर said...

@ संजय बेंगाणी जी: निश्चिंत रहिये, ऐसा बिल्कुल नहीं होगा. आगे से ज्यादा रेगुलरली पोस्ट करता रहूँगा.

वेताल शिखर said...

@ अरविन्द मिश्र जी: जी हाँ. कॉमिक्स तो बचपन की यादों को बुलाने का एक बढ़िया जरिए हैं. आपको पसंद आया देखकर खुशी हुई.

वेताल शिखर said...

@ दिनेशराय द्विवेदी जी: स्वागत. दूसरा भाग जल्दी ही.